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“शरणागति” आनंद मार्ग के आध्यात्मिक, संगठनात्मक और सामाजिक अनुभवों का जीवंत दस्तावेज़ है, जो साधना, सेवा और गुरु-भक्ति के मार्ग पर चलने वालों के लिए प्रेरणा और मार्गदर्शन का स्रोत है।

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Category: OTHER BOOKS
SKU: AMSARANAGATI
Dimensions: Height: 21.99, Width: 14.80, Length: 2.00 (cm)

Description

शरणागति (आचार्य रूद्रानन्द अवधूत द्वारा लिखित) — पुस्तक का विवरण

शरणागति” एक आत्मकथात्मक और प्रेरणादायक ग्रंथ हैजिसे आचार्य रूद्रानन्द अवधूत जी ने लिखा है। इसका मुख्य विषय अध्यात्म हैवह मार्गजिस पर साधक गुरु की छाया में धीरे-धीरे मोक्ष की ओर बढ़ता है। पुस्तक में लेखक ने अपने व्यक्तिगत अनुभवोंआध्यात्मिक साधनागुरु-शिष्य संबंधसंगठन कार्यऔर सामाजिक सेवा के विविध प्रसंगों को विस्तार से प्रस्तुत किया है।

मुख्य विशेषताएँ


आध्यात्मिक यात्रा: लेखक की साधक-जीवन की शुरुआतदीक्षाइष्टाकर्षणऔर संन्यास-जीवन की पृष्ठभूमि का विस्तार से वर्णन है। इसमें बताया गया है कि किस प्रकार बाह्य आडंबर से हटकर तांत्रिक दीक्षा मिली और साधना के गूढ़ रहस्यों को समझा गया।

 गुरु-शिष्य संबंध: पुस्तक में श्री श्री आनंदमूर्ति जी (आनंद मार्ग मिशन के संस्थापक) के साथ लेखक के निकट संबंधउनके मार्गदर्शनकृपा और परीक्षा के अनेक प्रसंग हैं। गुरु की भूमिका को मोक्ष-मार्ग में अपरिहार्य बताया गया है।

संगठनात्मक अनुभव: लेखक ने आनंद मार्ग संगठन में अपने विभिन्न दायित्वोंप्रशिक्षणप्रचार-कार्यऔर विभिन्न स्थानों (जैसे हिमाचलवाराणसीइलाहाबादआदि) पर मिले अनुभवों को साझा किया है। इसमें संगठन के विस्तारचुनौतियाँऔर सामाजिक सेवा के कार्यों का भी उल्लेख है।

 समकालीन प्रासंगिकता: पुस्तक में आधुनिक काल की भौतिकवादी चुनौतियोंविज्ञान और धर्म के द्वंद्वसमाज में मूल्यों की गिरावटऔर मानवता के भविष्य पर भी विचार किया गया है। लेखक ने आध्यात्मिक विज्ञान और मनोविज्ञान के समन्वय की आवश्यकता पर बल दिया है।

 प्रेरणादायक प्रसंग: पुस्तक में साधनासेवात्यागऔर भक्ति के अनेक प्रेरक प्रसंग हैंजो विशेषकर पूर्णकालिक कर्मियों और जिज्ञासु साधकों के लिए मार्गदर्शक सिद्ध हो सकते हैं।

शैली और उद्देश्य

आत्मकथात्मक शैली: लेखक ने अपने जीवन के अनुभवों को सीधेसंवेदनशील और ईमानदार भाषा में प्रस्तुत किया

 मार्गदर्शन: पुस्तक का उद्देश्य पाठकों को केवल कथा सुनाना नहींबल्कि उसके गूढ़ अर्थ को समझनेआत्मचिंतन करने और साधना-पथ पर अग्रसर होने के लिए प्रेरित करना है।

संगठन और समाज: यह ग्रंथ न केवल व्यक्तिगत साधना की बात करता हैबल्कि समाज-सेवा और संगठनात्मक जीवन के महत्व को भी रेखांकित करता है।

पुस्तक का मूल विषय अध्यात्म हैजिस पथ पर चलकर साधक गुरु की छाया में धीरे-धीरे मोक्ष पद प्राप्त करता है। अध्यात्म की इस दुर्गम यात्रा में गुरु की सहायता और अनुकंपा अपरिहार्य है…”

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